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भगवान श्री चित्रगुप्त जी चित्रगुप्ताष्टक
|| श्री चित्रगुप्ताष्टकम् ||
मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
लेखनीपट्टिकास्तं च चित्रगुप्तं नमाम्यहम्॥
मंगलम् चित्रगुप्तो मंगलम् स्वकायतम्। कायस्थ धर्मोस्तुते मंगलम् फलदायकम्। ओमकायम् अकायम् कालम् अकालम्। आदिम् अनादिम् महाकाल कालम्॥ 1 ॥
स्वाविभूर्तम् जन्मस्य रहितम्। कायस्थूलम् धर्माधिराजम्॥ 2 ॥
शिव ओम् सूत्रम् शाखम् विधातम्। शक्तिम् तनूजम् पराकृत कृपालम्॥ 3 ॥
महाकाल पुस्तम् लेखनी सुकालम्। मसि शारदाम् त्रय हस्ते शोभायम्॥ 4 ॥
चतुर्थम् दण्डम् दण्ड: विधानम्। सठ्यम् साठ्यम् समा चरेतम्॥ 5 ॥
लिखितम् पठितम् वर्णम् प्रदातम्। सुमतिम् प्रयज्ञम् ज्ञानम् प्रकाशम्॥ 6 ॥
पापम् पुण्यष्च फल म् नियंत म्। छणम् छणम् कृत लिखतम् रचितम्॥ 7 ॥
बुद्धिम् मर्जनम् विधिम् विवेकम्। दातार केवल चित्रस्य गुप्तम्॥ 8 ॥
॥ फलश्रुति ॥
चित्रगुप्ताष्टकम् प्रोक्तम् तोषये। येपठन्ति नराकायस्थ तेषांचित्रप्रसीदति।
।। प्रेम से बोलिए श्री चित्रगुप्त भगवान की जय ।।
भगवान श्री चित्रगुप्त जी चालीसा
भगवान श्री चित्रगुप्त जी चित्रगुप्ताष्टक
|| श्री चित्रगुप्ताष्टकम् ||
मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
लेखनीपट्टिकास्तं च चित्रगुप्तं नमाम्यहम्॥
मंगलम् चित्रगुप्तो मंगलम् स्वकायतम्। कायस्थ धर्मोस्तुते मंगलम् फलदायकम्। ओमकायम् अकायम् कालम् अकालम्। आदिम् अनादिम् महाकाल कालम्॥ 1 ॥
स्वाविभूर्तम् जन्मस्य रहितम्। कायस्थूलम् धर्माधिराजम्॥ 2 ॥
शिव ओम् सूत्रम् शाखम् विधातम्। शक्तिम् तनूजम् पराकृत कृपालम्॥ 3 ॥
महाकाल पुस्तम् लेखनी सुकालम्। मसि शारदाम् त्रय हस्ते शोभायम्॥ 4 ॥
चतुर्थम् दण्डम् दण्ड: विधानम्। सठ्यम् साठ्यम् समा चरेतम्॥ 5 ॥
लिखितम् पठितम् वर्णम् प्रदातम्। सुमतिम् प्रयज्ञम् ज्ञानम् प्रकाशम्॥ 6 ॥
पापम् पुण्यष्च फल म् नियंत म्। छणम् छणम् कृत लिखतम् रचितम्॥ 7 ॥
बुद्धिम् मर्जनम् विधिम् विवेकम्। दातार केवल चित्रस्य गुप्तम्॥ 8 ॥
॥ फलश्रुति ॥
चित्रगुप्ताष्टकम् प्रोक्तम् तोषये। येपठन्ति नराकायस्थ तेषांचित्रप्रसीदति।
।। प्रेम से बोलिए श्री चित्रगुप्त भगवान की जय ।।
भगवान श्री चित्रगुप्त जी चालीसा
।। भगवान श्री चित्रगुप्त जी चालीसा ।।
सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश।
ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश ।।
करो कृपा करिवर वदन, जो सरशुती सहाय।
चित्रगुप्त जस विमलयश, वंदन गुरूपद लाय ।।
"चौपाई"
जय चित्रगुप्त ज्ञान रत्नाकर । जय यमेश दिगंत उजागर ।।1।।
आज सहाय अवतरेउ गुसांई । कीन्हेउ काज ब्रम्ह कीनाई ।।2।।
अज की रचना मानव सुंदर । मानव मति अज होई निरूत्तर ।।3।।
भए प्रकट चित्रगुप्त सहाई । धर्मा धर्म गुण ज्ञान कराई ।।4।।
राचेउ धरम धरम जग मांही। धर्म अवतार लेत तुम पांही ।।5।।
अहम विवेकइ तुमहि विधाता । निज सत्ता पा करहिं कुघाता ।।6।।
श्रृष्टि संतुलन के तुम स्वामी । त्रय देवन कर शक्ति समानी ।।7।।
पाप मृत्यु जग में तुम लाए । भय का भूत सकल जग छाए ।।8।।
महाकाल के तुम हो साक्षी । ब्रम्हउ मरन न जान मीनाक्षी ।।9।।
धर्म कृष्ण तुम जग उपजायो । कर्म क्षेत्र गुण ज्ञान करायो ।।10।।
राम धर्म हित जग पगु धारे । मानव गुण सद्गुण अति प्यारे ।।11।।
विष्णु चक्र पर तुम्हीं विराजे । पालन धर्म करम शुचि साजे ।।12।।
महादेव के तुम त्रय लोचन । प्रेरक शिव अस तांडव नर्तन ।।13।।
सावित्री पर कृपा निराली । विद्यानिधि मां सब जग आली ।।14।।
रमा भाल पर कर अति दाया । श्रीनिधि अगम अकूत अगाया ।।15।।
उमा विच शक्ति शुचि राच्यो । जाके बिन शिव शव जग बाच्यो ।।16।।
गुरु बृहस्पति सुर पति नाथा । जाके कर्म गहइ तव हाथा ।।17।।
रावण कंस सकल मतवारे । तव प्रताप सब सरग सिधारे ।।18।।
प्रथम पूज्य गणपति महदेवा । सोऊ करत तुम्हारी सेवा ।।19।।
रिद्धी सिद्धी पाय द्वैनारी । विघ्नहरण शुभ काज संवारी ।।20।।
व्यास रचहि जब वेद पुराना । गणपति लिपिबद्ध हितमन ठाना ।।21।।
पोथी मसि शुचि लेखली दीन्हा । अवसर देय जगत कृत कीन्हा ।।22।।
लेखनी मसि सद कागद कोरा । तव प्रताप अजु जगत मझोरा ।।23।।
विद्या विनय पराक्रम भारी । तुम आधार जगत आभारी ।।24।।
राम कृष्ण गुरुवर गृह जाई । प्रथम गुरु महिमा गुण गाई ।।25।।
देववृत जप तप व्रत कीन्हा । इच्छा मृत्यु परम वर दीन्हा ।।26।।
धर्म हीन सौदास कुराजा । तप तुम्हार बैकुंठ विराजा ।।27।।
हरि पद दीन्ह धर्म हरि नामा । कायथ परिजन परम पितामा ।।28।।
सूर सुता नंदनी मनोहर । चित्रगुप्त संग ब्याही सुंदर ।।29।।
भानु विभानु विश्वभानु सुहाए । वीर्यभानु चतुरथ सुत पाए ।।30।।
नागसुता एरावती सयानी । अति सुंदर अति गुण खानी ।।31।।
ब्याही दूजी भामिनी सुंदर । अष्ठ पुत्र जिनके अति सुंदर ।।32।।
चारू सुचारू चित्र मतिभाना । चितचारू उरूण अतिंद्र हिमवाना ।।33।।
द्वादस पूत जगत अस लाए । राशी चक्र आधार सुहाए ।।34।।
जस पूता तस राशी रचाना । ज्योतिष के तुम जनक महाना ।।35।।
तिथि लगन होरा दिग्दर्शन । चारि अष्ट चित्रांश सुदर्शन ।।36।।
राशी नखत जो जातक धारे । धर्म कर्म फल तुमहि अधारे ।।37।।
जय जय जय चित्रगुप्त गुसांई । गुरूवर गुरु पद पाय सहांई ।।38।।
जो शत पाठ करइ चालीसा । जन्म मरण दुःख कटइ कलेसा ।।39।।
विनय करैं कुलदीप शुवेशा । राख पिता सम नेह हमेशा ।।40।।
"दोहा"
ज्ञान कलम, मसि सरस्वती, अंबर है मसिपात्र।
कालचक्र की पुस्तिका, सदा रखे दंडास्त्र ।।
पाप पुन्य लेखा करन, धार्यो चित्र स्वरूप।
श्रृष्टिसंतुलन स्वामीसदा, सरग नरक कर भूप ।।
।। इति श्री चित्रगुप्त चालीसा समाप्त:।।
भगवान श्री चित्रगुप्त चालीस पद स्तोत्र
॥ चित्रगुप्त चालीस पद स्तोत्र ॥
॥ दोहा ॥
मंगलम मंगल करन, सुन्दर बदन विशाल।
सोहे कर में लेखनी, जय जय दीन दयाल॥
सत्य न्याय अरु प्रेम के, प्रथम पूज्य जगपाल।
हाथ जोड़ विनती करु, वरद हस्त धरु भाल॥
॥ चौपाई ॥
चित्रगुप्त बल बुद्धि उजागर, त्रिकालज्ञ विधा के सागर।
शोभा दक्षिण पति जग वनिदत, हसमुख प्रिय सब देव अनन्दित॥
शान्त मधुर तनु सुन्दर रुपा, देत न्याय सम द्रष्टि अनूपा।
क्रीट मुकुट कुन्डल धुति राजे, दहिन हाथ लेखनी विराजे॥
वाम अंग रिद्धि सिद्धि विराजे, जाप यज्ञ सौ कारज साजे।
भाव सहित जो तुम कह ध्यावे, कोटि जन्म के पाप नसावे॥
साधन बिन सब ज्ञान अधूरा, कर्म जोग से होवे पूरा।
तिन्ह मह प्रथम रेख तुम पाई, सब कह महिमा प्रकट जनाई॥
न्याय दया के अदभुत जोगी, सुख पावे सब योगी भोगी।
जो जो शरण तिहारी आवे, वुधिवल, मनवल, धनवल पावे॥
तुम व्रहमा के मानस पूता, सेवा में पार्षद जम दूता।
सकल जीव देव कर्मन में वांधे, तिनको न्याय तुम्हारे कांधे॥
तुम तटस्थ सब ही की सेवा, सब समान मानस अरु देवा।
निर्विध्न प्रतिनिधि ब्रहमा के, पालक सत्य न्याय बसुधा के॥
तुम्हारी महिमा पार न पावे, जो शारद शत मुख गुण गावें।
चार वेद के रक्षक त्राता, मर्यादा के जीवन दाता॥
ब्रहमा रचेऊ सकल संसारा, चित्त तत्व सब ही कह पारा।
तिन चित्तन में वासु तुम्हारा, यह विधि तुम व्यापेऊ संसारा॥
चित्त अद्रश्य रहे जग माही, भौतिक दरसु तुम्हारो नाही।
जो चित्तन की सीमा माने, ते जोगी तुम को पहचाने॥
हमहि अगम अति दरसु तुम्हारा, सुगम करहु निज दया अधारा।
अब प्रभु कृपा करहु एहि भांति, सुभ लेखनी चे दिन राती॥
गुप्त चित्र कह प्रेरण कीजै, चित्रगुप्त पद सफल करीजै।
आए हम सब शरण तिहारी, सफल करहु साधना हमारी॥
जेहि जेहि जोनि भभें जड़ जीवा, सुमिरै तहां तुम्हारी सीवा।
जीवन पाप पुण्य तै ऊची, पूजन उपासना सौ सींचौ॥
जो-जो कृपा तुम्हारी पावें, सो साधन को सफल बनावें।
सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी, लहै मनोरथ गृही विरागी॥
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, पावें कर्मजोग ते ताता।
अंधकार ते आन बचाओं, मारग विधिवत देव बताओं॥
शाश्वत सतोगुणी सतरुप, धर्मराज के धर्म सहूत।
मसि लेखन के गौरव दाता, न्याय सत्य के पूरण त्राता॥
जो जो शरण तिहारी आबे, दिव्य भाव चित्त में उपजाबे।
मन बुधि चित्त अहिमति के देवा, आरत हरहु देउ जन सेवा॥
श्रमतजि किमपि प्रयोजन नाही, ताते रहहु गुपुत जग माही।
धर्म कर्म के मर्मकज्ञाता, प्रथम न्याय पद दीन्ह विधाता॥
हम सब शरण तिहारि आये, मोह अरथ जग में भरमाये।
अब वरदान देहु एहि भांति, न्याय धर्म के बने संधाति॥
दिव्य भाव चित्त में उपजावें, धर्म की सेवा पावे।
कर्मजोग ते जग जस पावें, तुम्हरि महिमा प्रकट जनावें॥
॥ दोहा ॥
यह चालीस भकितयुक्त, पाठ करै जो कोय।
तापर कृपा प्रसन्नता, चित्रगुप्त की होय॥
॥ इति चित्रगुप्त चालीस पद स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
सादगी की मूरत, सहृदयता के प्रतीक एवं जन-सेवा के तपस्वी आदरणीय भाई साहब श्री आलोक संजर जी, आपको जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएँ!
सादगी की मूरत, सहृदयता के प्रतीक एवं जन-सेवा के तपस्वी आदरणीय भाई साहब श्री आलोक संजर जी, आपको जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएँ!
राजनीति के कोलाहल में भी 'संत' की भांति सौम्यता बनाए रखना और जन-जन के सुख-दुख में एक सजग प्रहरी की तरह सदैव अडिग रहना, आपके व्यक्तित्व की वह सुगंध है जिससे भोपाल की माटी महकती है। आपकी सहजता और मधुर वाणी हम सभी के लिए सदैव प्रेरणा का पाथेय रही है।
"साधना की देह पर शुचिता का चन्दन हों आप,
लोक-मंगल के लिए अविराम वंदन हों आप ।
पुष्प की कोमलता और वज्र सा संकल्प भी,
राजनीति के समर में संत सा प्रतिमान हों आप।"
आपकी लोकप्रियता किसी पद या प्रभाव की मोहताज नहीं, बल्कि आपके उस 'सहज संवाद' की देन है जो सीधे व्यक्ति के हृदय को स्पर्श करता है। सत्ता के गलियारों में रहकर भी अपनी जड़ें जमीन से जोड़े रखना और हर सामान्य जन के लिए सुलभ रहना, आपके विराट व्यक्तित्व का प्रमाण है।
राजनीति आपके लिए मात्र नीति नहीं, बल्कि 'लोक-नीति' और सेवा का अनुष्ठान है। जिस प्रकार एक दीपक स्वयं जलकर प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार आप निःस्वार्थ भाव से समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित हैं। आपकी कार्यशैली में अनुशासन और व्यवहार में जो माधुर्य है, वह बिरला ही देखने को मिलता है।
सादगी ऐसी कि हर कोई अपना समझे, और विद्वता ऐसी कि हर कोई सम्मान करे। राजनीति की शुचिता के प्रतिमान, आदरणीय भाई साहब श्री आलोक संजर जी को जन्म-उत्सव पर कोटि-कोटि नमन। आपका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और शुचिता का एक जीवंत ग्रंथ है।
ईश्वर आपको यश, वैभव, और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे। आपका मार्गदर्शन हमें आने वाले अनेक वर्षों तक मिलता रहे, यही अभिलाषा है।
आपके जन्मदिवस के पावन अवसर पर पुनः मंगलकामनाएं......
युवा जोड़ो अभियान - अब हर युवा बनेगा समाज की ताकत
नई दिल्ली।
आज का युग युवाओं का युग माना जाता है और किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी युवा शक्ति ही होती है। जब युवा जागरूक, संगठित और सक्रिय होते हैं, तब समाज न केवल विकास की ओर अग्रसर होता है, बल्कि अपनी एक नई पहचान भी स्थापित करता है। इसी उद्देश्य को लेकर “युवा जोड़ो अभियान” एक प्रभावी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है, जो युवाओं को समाज से जोड़ते हुए उन्हें नेतृत्व और जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि समाज का सम्मान तभी बढ़ता है, जब उसके युवा अपने कर्तव्यों को समझते हुए व्यक्तिगत उन्नति के साथ-साथ सामूहिक विकास के लिए भी समर्पित रहें। “युवा जोड़ो अभियान” युवाओं को यह एहसास कराता है कि समाज से जुड़ना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इस अभियान के अंतर्गत युवाओं को अपनी शक्ति, क्षमता और विचारों का उपयोग समाजहित में करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य है कि युवा अपनी ऊर्जा से समाज को सशक्त बनाएं, अपनी प्रतिभा से समाज को गौरवान्वित करें और अपने कार्यों के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाएं।
साथ ही, यह पहल युवाओं को अपनी उपलब्धियों को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए उन्हें समाज के गौरव से जोड़ने की प्रेरणा देती है। जब कोई युवा आगे बढ़कर समाज का नाम रोशन करता है, तो वह पूरे समाज के सम्मान को भी बढ़ाता है।
अभियान में अनुभव साझा करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। युवाओं से आह्वान किया जा रहा है कि वे अपने जीवन के अनुभव, संघर्ष और सीख को समाज के साथ साझा करें, ताकि वे अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकें और समाज को अधिक जागरूक एवं संगठित बनाया जा सके।
“युवा जोड़ो अभियान” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित हो रहा है, जो समाज को एकजुट करने, नई सोच विकसित करने और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
समाज के हर युवा से मेरा आग्रह है कि वे आगे आएं, समाज से जुड़ें और एक सशक्त, संगठित एवं गौरवशाली समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। युवा शक्ति ही हमारे समाज की असली ताकत है, और जब युवा एकजुट होंगे, तभी समाज नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। - वेद आशीष श्रीवास्तव राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
जन्मदिन विशेष: महान फिल्मकार राजकुमार संतोषी – संघर्ष, सृजन और सफलता की प्रेरक गाथा
"जिसने ‘दामिनी’ से इंसाफ की पुकार दी, ‘घायल’ से अन्याय के विरुद्ध क्रांति जगाई, और ‘भगत सिंह’ से देशभक्ति की लौ प्रज्वलित की – वही हैं राजकुमार संतोषी।"
आज हम राजकुमार संतोषी जी के जन्मदिवस (5 जुलाई) पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करते हैं। उनका जीवन केवल एक फिल्म निर्देशक का नहीं, बल्कि एक संघर्षशील साधक का जीवन रहा है, जिसने परिस्थितियों को अपनी कला की लौ से चीरकर सफलता का उजास रचा।
संघर्ष से सृजन तक की यात्रा
1956 में चेन्नई में जन्मे राजकुमार संतोषी जी फिल्मकार पी.एल. संतोषी के पुत्र हैं, किंतु फिल्मी विरासत के बावजूद उनकी राह आसान नहीं रही। पिता की असमय मृत्यु के बाद उन्होंने कम उम्र में ही पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपनों को आगे बढ़ाया। सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने निर्देशन की बारीकियाँ सीखी और अपने गुरु गोविंद निहलानी के साथ पाँच फिल्मों में कार्य कर अनुभव प्राप्त किया।
फिल्मों से क्रांति और समाज को दिशा
राजकुमार संतोषी एक ऐसे फिल्मकार हैं जिनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी समाहित होता है।
उनकी प्रमुख फिल्मों की सूची ही उन्हें भारतीय सिनेमा का स्तंभ साबित करती है:
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‘घायल’ (1990) – अन्याय के खिलाफ आम आदमी की आवाज़
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‘दामिनी’ (1993) – न्याय और नारी शक्ति का प्रतीक
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‘अंदाज़ अपना अपना’ (1994) – आज भी कॉमेडी का बेमिसाल नमूना
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‘द लेजेंड ऑफ भगत सिंह’ (2002) – देशभक्ति की अमर गाथा
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‘गांधी गोडसे: एक युद्ध’ (2023) – वैचारिक मंथन और ऐतिहासिक दृष्टि
उनकी फिल्मों ने दर्शकों को न केवल गुदगुदाया, बल्कि झकझोरा भी।
पुरस्कार और पहचान
राजकुमार संतोषी को फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाज़ा गया है।
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'घायल', 'दामिनी' जैसी फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
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'द लेजेंड ऑफ भगत सिंह' को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ।
"लाहौर 1947" – एक ऐतिहासिक दस्तावेज़, एक मानवीय कथा
यह फिल्म न केवल एक ऐतिहासिक घटना को दर्शाएगी, बल्कि उस विभाजन में बिखरे मानवीय रिश्तों, दर्द, संघर्ष और जज्बे को भी गहराई से प्रस्तुत करेगी।
फिल्म में विभाजन के समय लाहौर जैसे सांस्कृतिक केंद्र की सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक उथल-पुथल को बेहद संवेदनशीलता और मजबूती के साथ दर्शाया गया है।
आने वाला अध्याय: 'चित्रगुप्त की सभा' (2026)
कायस्थ समाज के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त पर आधारित फिल्म "चित्रगुप्त की सभा" का निर्माण राजकुमार संतोषी द्वारा किया जा रहा है – यह न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बनेगी, बल्कि संतोषी जी की रचनात्मक दृष्टि का एक नया अध्याय भी।
प्रेरणा के स्रोत, युवा निर्माता-निर्देशकों के लिए आदर्श
राजकुमार संतोषी केवल एक फिल्म निर्देशक नहीं, बल्कि कला, साहस और समाज सेवा के प्रतीक हैं। उनका जीवन दिखाता है कि कम संसाधनों, सीमित शिक्षा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी कोई व्यक्ति अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और समर्पण से क्या कुछ कर सकता है।
जन्मदिवस पर शुभकामनाएँ
आज उनके जन्मदिवस पर हम सभी कायस्थ समाज और फिल्म प्रेमियों की ओर से उन्हें असीम शुभकामनाएँ देते हैं।
"आप स्वस्थ रहें, सक्रिय रहें, और सिनेमा के माध्यम से समाज को नई दिशा देते रहें।"
आपकी आगामी फिल्म "लाहौर 1947" और "चित्रगुप्त की सभा" के लिए भी हमारी शुभकामनाएँ।
राजकुमार संतोषी – नाम नहीं, सिनेमा की एक विचारधारा।
हैप्पी बर्थडे, राज जी !
आपका जीवन, हमारी प्रेरणा!
वेद आशीष श्रीवास्तव
राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा
समस्त देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें
गणतंत्र दिवस, जो प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है, भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह दिन 1950 में भारत के संविधान के लागू होने के बाद पहली बार मनाया गया, जब हमारे देश ने अपनी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोकतांत्रिक तरीके से अपने शासन व्यवस्था का निर्माण किया। यह दिन भारतीय राष्ट्रीयता और लोकतंत्र की शक्तियों को प्रदर्शित करने का प्रतीक है।
26 जनवरी 1950 को जब डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और राष्ट्रीय ध्वज फहराया, तो यह घटना देशवासियों के लिए गर्व का क्षण था। इसके साथ ही भारतीय संविधान को लागू करने का सफर शुरू हुआ, जिससे नागरिकों को उनके मूल अधिकार, स्वतंत्रता, और समानता सुनिश्चित हुई। यह संविधान एक मजबूत लोकतांत्रिक प्रणाली का आधार बना, जिसमें भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने का मौका मिला।
गणतंत्र दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, बल्कि यह हमें हमारे संविधान, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है। यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।
गणतंत्र दिवस का यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि हम सभी भारतीय नागरिक हैं और हमें अपने संविधान के तहत दिए गए अधिकारों का सही उपयोग करना चाहिए ताकि हम अपने देश की प्रगति में योगदान दे सकें।
वेद आशीष श्रीवास्तव
युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष
कायस्थ गौरव, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी बोस जी को उनकी पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धासुमन
कायस्थ गौरव : रास बिहारी बोस का जन्म बंगाल के एक कायस्थ परिवार में 25 मई 1886 को हुआ था। बोस काफी कम उम्र में साल 1905 में ही क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ गए थे। एक बार बोस गवर्नर जनरल लॉर्ड चार्ल्स हार्डिंग की हत्या करने का मन बना चुके थे। यह 23 दिसंबर 1912 का दिन था। इस दिन लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पहली बार कोलकाता आने वाले थे।
बंगाल के युवा क्रांतिकारी बसंत कुमार विश्वास को बम फेंकने की जिम्मेदारी दी गई। योजना थी कि लॉर्ड हार्डिंग हाथी पर बैठकर आएंगे और इतनी ऊंचाई पर सिर्फ बसंत कुमार विश्वास ही बम फेंक सकते हैं। जब गवर्नर जनरल की सवारी निकली तो चांदनी चौक पर रास बिहारी और बसंत कुमार पहले से मौजूद थे। बम फेंका गया और जोरदार विस्फोट से इलाके में भगदड़ मच गई।
घटना के बाद सभी को लगा कि हॉर्डिंग की मौत हो गई, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हार्डिंग घायल हुए और उनका हाथी मारा गया। रास बिहारी की ये कोशिश नाकाम हुई। इसके तुरंत बाद वो देहरादून लौट आए और सुबह ऑफिस जाकर पहले की तरह काम करने लगे।
गिरफ्तारी का खतरा देख जापान चले गए बोस उस समय फॉरेस्ट रिसर्च सेंटर, देहरादून में क्लर्क की नौकरी करते थे। हार्डिंग की जान को खतरा देखकर अंग्रेजी हुकूमत ने क्रांतिकारियों की धरपकड़ शुरू कर दी। गिरफ्तारी का खतरा देख बोस जापान चले गए। अंग्रेज सरकार उनके पीछे पड़ गई। इस दौरान बोस ने जापान में 17 ठिकाने बदले। उन्हें जापान के एक ताकतवर नेता ने अपने घर में छुपाया। 21 जनवरी 1945 को उनका निधन हो गया।
आजाद हिंद फौज की कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंपी अगर आजाद हिंद फौज की बात की जाए, तो सबसे पहले दिमाग में सुभाष चंद्र बोस का ख्याल आता है, लेकिन इस सेना को बनाने में भी रास बिहारी का बड़ा रोल था। 1943 में सुभाष चंद्र बोस भारत छोड़कर जर्मनी पहुंचे। रास बिहारी ने सुभाष चंद्र को बैंकॉक लीग की दूसरी कॉन्फ्रेंस में बुलाया। 20 जून को सुभाष चंद्र टोक्यो पहुंचे।
5 जुलाई को नेताजी का वहां जोरदार स्वागत हुआ। उस समय रास बिहारी इंडियन इंडिपेंडेंस लीग के प्रेसिडेंट थे। उन्होंने लीग और इंडियन नेशनल आर्मी की कमान नेताजी को सौंप दी। इसके बाद रास बिहारी उनके सलाहकार की भूमिका में रहे। रास बिहारी को जापान सरकार ने अपने दूसरे बड़े अवॉर्ड ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन से सम्मानित किया था।
रूस के क्रांतिकारी नेता व्लादिमीर लेनिन का निधन लेनिन का असली नाम व्लादिमीर इलीइच उल्यानोव था। वे एक रूसी साम्यवादी क्रांतिकारी और राजनेता थे। मार्क्सवादी विचारधारा के ध्वजवाहक रहे लेनिन को बोल्शेविक क्रांति का नेता माना जाता था। जार सरकार के विरोध में उन्हें कजन इंपीरियल यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया था। इसके बाद लेनिन ने कानून की शिक्षा हासिल की।
साल 1889 में मार्क्सवादियों का संगठन बनाया। क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते उन्हें जेल जाना पड़ा। 21 जनवरी 1924 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया। उनकी बॉडी को एम्बाम (रासायनिक तरीके से संरक्षित) किया गया है। उनकी बॉडी आज भी मॉस्को के रेड स्क्वॉयर में रखी हुई है।
कायस्थ समाज की आवाज उठाते हुए वेद आशीष श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री को भेजे ईमेल में, संविधान दिवस के विज्ञापन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर न होने पर जताई आपत्ति
नई दिल्ली: अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप श्रीवास्तव (रिटायर irs) की आवाज को बुलंद करते हुए युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष वेद आशीष श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी संविधान दिवस के विज्ञापन में संविधान सभा के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर का गायब होना लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। वेद आशीष ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को ईमेल भेजकर इस मामले में जानकारी दी और चिंता व्यक्त की कि यदि डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तस्वीर को जानबूझकर विज्ञापन से हटाया गया है, तो यह कायस्थ समाज का अपमान है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम एवं संविधान निर्माण में कायस्थों के योगदान को नकारने की कोशिश की जा रही है।
वेद आशीष ने पत्र में कहा, "कायस्थ समाज को लगातार भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा नजरअंदाज किया जा रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। संविधान दिवस के अवसर पर भारतीय संविधान के निर्माता और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद का नाम और चित्र विज्ञापन से हटा दिया गया है, जो समाज के लिए अपमानजनक है।" उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर और सरदार पटेल के साथ-साथ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी समान सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि उन्होंने भारतीय संविधान की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संविधान के निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद के अलावा कई अन्य महापुरुषों ने भी योगदान दिया था, जिनमें डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा, श्री राम व्योहार सिन्हा, श्री वसंत कृष्ण वैध, श्री प्रेम बिहारी रायज़ादा, और श्री जगत नारायण लाल शामिल थे। इन महापुरुषों ने भारतीय संविधान के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। वेद आशीष ने प्रधानमंत्री से अपील की कि "कायस्थ समाज का योगदान राजनीति के तराजू पर न तोला जाए और उन्हें उनका वास्तविक सम्मान और अधिकार दिया जाए।"
वेद आशीष ने आगे कहा, "आज कायस्थ समाज को अपनी स्थिति सुधारने के लिए संगठित रहने की आवश्यकता है। अगर हम अपनी आवाज नहीं उठाएंगे, तो हम अपने गौरवपूर्ण इतिहास को खो देंगे।" उन्होंने संविधान दिवस पर समूचे कायस्थ समाज से अपील की कि वे एकजुट हों और समाज के प्रति हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। उनका मानना है कि "अगर कोई समाज अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाता, तो वह समाज धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।"
इस ईमेल के माध्यम से वेद आशीष ने प्रधानमंत्री से यह भी आग्रह किया कि भारत सरकार कायस्थ समाज के योगदान को उचित रूप से मान्यता दे और उनका मूल अधिकार न केवल संविधान के संदर्भ में, बल्कि अन्य सभी क्षेत्रों में भी सुनिश्चित किया जाए।
वेद आशीष ने इस अवसर पर संविधान दिवस की शपथ लेने की अपील की, जिसमें कायस्थ समाज एकजुट होकर अपनी एकता और सम्मान को प्रदर्शित करें। इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों ने वेद आशीष के बयान का समर्थन किया है, और अब यह मामला प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।

वेद आशीष श्रीवास्तव बने अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने वेद आशीष श्रीवास्तव को अपनी युवा शाखा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुप श्रीवास्तव (आईआरएस, सेवानिवृत्त) ने इस नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा कि वेद आशीष का समाज के प्रति समर्पण और उनकी नेतृत्व क्षमता महासभा की युवा शाखा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
वेद आशीष श्रीवास्तव की इस नियुक्ति पर वरिष्ठ संपादक महेश श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त आईएएस मनोज श्रीवास्तव, पूर्व सांसद डॉ. आर.के. सिन्हा, पूर्व सांसद आलोक संजर, स्वामी चक्रपाणि महाराज, फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोषी और अभिनेता अतुल श्रीवास्तव ने उन्हें अपने आशीर्वाद और शुभकामनाएं दी हैं।
महासभा को विश्वास है कि वेद आशीष श्रीवास्तव के नेतृत्व में कायस्थ समाज नई ऊंचाइयों को छुएगा और युवाओं के बीच एकता और जागरूकता बढ़ेगी।
वेद आशीष श्रीवास्तव का जीवन परिचय
वेद आशीष श्रीवास्तव, एक युवा समाजसेवी, उद्यमी, और कायस्थ समाज के सम्मानित प्रतिनिधि हैं। वे अपनी उम्र के छोटे से दौर में ही समाज की सेवा में गहरी छाप छोड़ चुके हैं। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण और कार्य के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।
वेद आशीष का जन्म भोपाल, मध्यप्रदेश में हुआ। वे अपने घर में "रानू" के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनके पिता जीवनदानी आर्य समाजी थे, जिन्होंने समाजसेवा के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके दादा, स्वर्गीय श्री रज्जूलाल श्रीवास्तव, जिन्हें दीवान साहब के नाम से जाना जाता था, एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। उनका परिवार पुराने भोपाल के मारवाड़ी रोड स्थित एक निजी कोठी में रहता था, जिसे दादा ने लालवानी प्रेस को बेच दिया था, और वह अब लालवानी प्रेस रोड के नाम से जाना जाता है।
वेद आशीष ने अपनी सामाजिक यात्रा 17 वर्ष की आयु में शुरू की। उन्होंने 1991 से विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय योगदान देना शुरू किया। 1996 से वे सक्रिय रूप से सामाजिक कार्यों में भाग ले रहे हैं और विभिन्न संस्थाओं के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने स्वयं सेवी संगठन आसरा लोक कल्याण संस्था की स्थापना की, जिसके माध्यम से उन्होंने कई सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन किया। वे आलोकसभा का आनंद उत्सव और पुरानी किताबों का अपना घर किताब घर के प्रेणता भी हैं। इसके अलावा, उन्होंने कायस्थ समाज के लिए एक बहुउपयोगी वेब पोर्टल का निर्माण किया है।
वेद आशीष श्रीवास्तव का सामाजिक योगदान विशेष रूप से कायस्थ समाज को डिजिटल रूप में एकजुट करने में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कायस्थसमाज.इन, कायस्थन्यूज.इन, और कायस्थसमाजशादी.कॉम जैसे डिजिटल प्लेटफार्म स्थापित किए हैं, जो समाज के लोगों को संगठित करने और संसाधनों को साझा करने में सहायक साबित हुए हैं।
वे एक उद्यमी और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनके समाजसेवा के प्रति समर्पण का एक उदाहरण यह है कि वे अपनी आय का 10% हिस्सा समाज की भलाई के लिए दान करते हैं। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप, अब तक 1 लाख से अधिक कायस्थ परिवारों को एकजुट किया जा चुका है, जिनमें प्रशासन, कला और फिल्म उद्योग से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हैं।
वेद आशीष श्रीवास्तव के वर्तमान और पूर्व पद:
- संस्थापक – अधिष्ठाता, सार्वदेशिक कायस्थ युवा प्रतिनिधि संस्था, मध्य प्रदेश
- निर्माणकर्ता – कायस्थ समाज वेब पोर्टल (www.kayasthasamaj.in, www.kayasthasamajshaadi.com, www.kayasthanews.in)
- अध्यक्ष – प्रबधसंचालक, आसरा लोक कल्याण को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड
- व्यवस्थापक – श्री चित्रगुप्त मंदिर 1100 आवास गृह, भोपाल
- अध्यक्ष – आसरा लोक कल्याण क्रय-विक्रय सहकारी समिति मर्यादित
- मुख्यालय आयुक्त – भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, मध्य प्रदेश
- संभाग प्रमुख – विचार मंडल, स्वदेशी जागरण मंच, मध्य प्रदेश
- प्रदेश अध्यक्ष – कायस्थ महापंचायत, मध्य प्रदेश
- अध्यक्ष – म.प्र. युवा कायस्थ संगठन
- सचिव – भोपाल जिला चित्रगुप्त कल्याण मंडल
- संचालक – आर्य वीर दल, मध्य प्रदेश और विदर्भ
- प्रतिनिधि – मध्य भारतीय आर्य प्रतिनिधि सभा
- सभासद – आर्य समाज महावीर नगर, भोपाल
- प्रदेश सहसंयोजक – भारतीय जनता पार्टी, सांस्कृतिक प्रकोष्ठ
- संयोजक – विवेकानंद विचार मंडल, मध्य प्रदेश
- सांसद प्रतिनिधि – संसद सदस्य, 16वीं लोकसभा, भोपाल-19
- निदेशक – कात्यायनी टेलीकाॅम सर्विसेज प्र. लि.
- वित्तीय सलहाकार – संतोषी फिल्म एंड प्रोडक्शन एलएलपी
- निदेशक – एऍमजी, इवेंट एंड इंटरटेनमेंट
श्री चित्रगुप्त मंदिर, 1100 क्वार्टर्स, भोपाल में श्री चित्रगुप्त पूजन एवं यम द्वितीया पर्व का भव्य आयोजन
भोपाल, 3 नवंबर 2024: भोपाल जिला चित्रगुप्त कल्याण मंडल एवं सार्वदेशिक कायस्थ युवा प्रतिनिधि संस्था के तत्वावधान में श्री चित्रगुप्त पूजन एवं यम द्वितीया पर्व का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे श्री चित्रगुप्त मंदिर, 1100 क्वार्टर्स, अरेरा कॉलोनी में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का आरंभ श्री चित्रगुप्त जी की कथा से हुआ, जिसमें भक्तों ने ध्यान एवं श्रद्धा के साथ कथा को श्रवण किया। इसके बाद कलम दावत का पूजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने भाग लिया। हवन का आयोजन विशेष रूप से संपन्न हुआ, जिसमें समस्त उपस्थित जनों ने आहूतियां अर्पित कीं। इसके साथ ही महाआरती का आयोजन भी किया गया, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद श्री अलोक संजर ने शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “चित्रगुप्त जी की पूजा हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और हमें इसे संजोकर रखना चाहिए।” विशेष अतिथियों में सार्वदेशिक कायस्थ युवा प्रतिनिधि संस्था के अधिष्ठाता वेद आशीष श्रीवास्तव, शैलेंद्र निगम, संदीप श्रीवास्तव, जय शंकर श्रीवास्तव, संजीव श्रीवास्तव ‘संजू’ एवं शेखर श्रीवास्तव उपस्थित थे।

पूजा अर्चना के यजमान वेद आशीष श्रीवास्तव रहे, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूजा के बाद भाई दूज का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बहनों ने भाइयों को टीका लगाया। इस मौके पर सभी ने प्रसाद के साथ-साथ कलम का वितरण भी किया, जो विशेष रूप से कायस्थ समाज की पहचान है।

इस सफल आयोजन ने न केवल धार्मिक भावनाओं को जगाया, बल्कि समुदाय में एकता और भाईचारे की भावना को भी प्रबल किया। सभी उपस्थित जनों ने इस पर्व का आनंद लिया और एक-दूसरे के साथ मिलकर दिवाली की खुशियों को साझा किया।

राष्ट्रीय संगत-पंगत जन जागरण रथ यात्रा का सफल आयोजन
8 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय संगत-पंगत जन जागरण रथ यात्रा कार्यक्रम को लमही ग्राम, वाराणसी में सफलता पूर्वक सम्पन्न किया गया। इस विशेष अवसर पर मुंशी प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आर.के. सिन्हा (पूर्व राज्यसभा सांसद) की अध्यक्षता में हुआ। प्रातः 10:00 बजे डॉ. सिन्हा ने वाराणसी आगमन के बाद होटल क्यारा में श्रीमती रीबू श्रीवास्तव (वरिष्ठ राष्ट्रीय नेत्री, कायस्थ महासभा भारत) के साथ पत्रकार वार्ता की। इस संवाद में कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
इसके बाद, प्रातः 11:00 बजे रथ यात्रा मुंशी प्रेमचंद स्मारक, लमही ग्राम पहुंची, जहाँ श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में स्थानीय समाज के अनेक प्रतिनिधियों और पत्रकारों ने हिस्सा लिया और सामाजिक जागरूकता के महत्व पर चर्चा की।
दोपहर 3:00 बजे, लमही ग्राम से हरहुआ रिंग रोड होते हुए बाबतपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए प्रस्थान किया गया। यह यात्रा 2 अक्टूबर, 2024 को डॉ. आर.के. सिन्हा के नेतृत्व में प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है।
इस रथ यात्रा ने न केवल मुंशी प्रेमचंद जी के योगदान को याद किया, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर चर्चा और जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। सभी सहभागी इस प्रयास को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए एकजुट रहे।
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राष्ट्रीय संगत - पंगत जन जागरण रथ यात्रा
2 अक्टूबर 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी
की जन्मस्थली से प्रारम्भ....














