सब रंग हैं जिसमें , वो है कैलाश सारंग - डॉ . औसाफ़ शाहमीरी खुर्रम
रंगों से इंसान का गहरा रिश्ता नाता है । कुदरत ने सबकी पसंद के रंग इस संसार में बनाए हैं , मगर अमूमन लोगों को इंद्रधनुष की सतरंगी , नौरंगी या बहुरंगी छटा देखकर बेहद खुशी होती है , हालांकि क़ौस - ए कजह यानी इन्द्रधनुष में मौजूद कुछ रंग ऐसे भी होते हैं , जो इंसान आमतौर पर पसंद नहीं करता , लेकिन इस इन्द्रधनुष में शामिल उसका पसंदीदा रंग होने से उसे उन रंगों से भी कतई परहेज़ नहीं होता , जो उसे नापसंद होते हैं । यानी कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अगर किसी की शख्शियत में लोगों को अपने पसंदीदा रंग की झलक देखने को मिलती है , तो वो उसके बदरंगों या एबों को भी नज़रअंदाज कर देते हैं और उसकी शख्शियत में मौजूद अपने पसंदीदा रंग पर ही नज़र रखते हैं और फिर रफ्ता रफ्ता लोगों को वो अपने ही रंग में रंगा नज़र आने लगता है ।
बेबाक़ , बेतकल्लुफ , बेदाग , बेमिसाल , शख्शियत , बाकिरदार , बेनज़ीर सियासतदाँ , बेजोड़ उस्ताद , बेलौस , हमदर्द , बाअदव दोस्त , बाविकार , उर्दूदां अदबनदाज़ जो मुश्किलों और मसाईल से करता है जंग , जिसमें अब भी है नया जोश , नई उमंग , इस उम्र में भी जिसकी रंगों में है कुछ कर गुजरने की तरंग , शख्शियत के आसमान पर जिसकी ऊंची उड़ती है पतंग , रक़ीब है जिससे तंग और रफीक़ है जिसके संग और जिसके साथ दोनों है यानी शीशा - ओ - संग वो ही तो है कैलाश सारंग
दरअसल कैलाश सारंग की शख़्सियत और उनके किरदार का जैसा संगम मैंने देखा और पाया है , वैसा अब तक मुझे किसी और में कहीं भी नज़र नहीं आया । उनकी जिंदगी ऐसी खुली किताब की तरह है , जो उनकी शख्शियत के सफेद पक्षों पर उनके किरदार की सुरमई रोशनाई से कुछ इस तरह तेहरीर है कि सिर्फ उनके दोस्त ही नहीं और मेरे जैसे उनके खैररव्वाह ही नहीं बल्कि उनके रक़ीब भी इस हक़ीकत को मुकम्मल तौर पर तस्लीम करते हैं कि उनका ज़ाहिन और बातिन बिल्कुलं वैसा ही है , जैसे वो हैं यानी सौ टंच खरे किसी किस्म का भी खोटापन या मिलावट नहीं दिखती है ।
सुरमई चमकदार सूरत की तरह उनकी सीरत भी चिराग की तरह रोशन है । उनमें कुल कितनी खूबियां और खामियां है , इसका निसाब और हिसाब तो मैं अभी तक नहीं लगा पाया हूँ , हां मगर इतना जरूर कह सकता हूं कि उनकी रंगीन शनिव्सयत के हैं कई रूप और रंग , शायद इसीलिए उनके साथ जुड़े हैं सबके रंग - ढंग और कौन है मज़लूम ? कौन है दबंग ? यह भी खूब जानते है आदमीशनास कैलाश नारायण सारंग । अगर यूं कहें तो शायद नामुनासिव और बेमतलब नहीं होगा कि वो हमारंग है , बेहतरीन हैं , बहुरंगीन हैं । उन जैसे बेनजीर लोगों के लिए ही शायद मशहूर शायर सूफी गुलाम हमदानी “ मुसहफी ” ने कहा है कि “ तुमसे उस्ताद के लिए मेरी शायरी बेकार है , साथ सारंगी का बुलबुल के लिए दुश्वार है । ” अनगिनत तर्ज़ी में ढली उनकी शख्शियत पर कलम चलाना वाकई दुश्वार काम है , क्योंकि उन जैसे लोगों के बारे में कोई भी अगर किस - किस ज़ाविये अथवा कोण से भी लिखेगा , फिर भी कुछ न कुछ लिखने से बाक़ी रह ही जाएगी । बकौल हज़रत - ए - दाग देहलवी :
क्या लिखूं , कितना लिखूं , जितना लिखूं , उतना ही कम
हज़रत - ए - दाग के कलाम में , में क्या कहूं कितना है दम
कैलाश सारंग कितने दमदार हैं , यह उनके दुश्मन बाखूबी जानते होंगे और कितने बेदम हैं , इसके बारे में उनके दोस्त ज़्यादा बेहतर बता सकते हैं , हां मगर हम यह कह सकते हैं , जो भी बेबस , बेकस , माअजूर , मज़बूर , मज़लूम उनके पास जाता होगा , तो वो खुश होकर ही उन्हें दुआएं देता हुआ ही वापस आता होगा , क्योंकि कलंदराना और सूफियाना मिज़ाज तो उन्हें उनके पुरखों से विरासत में मिला है । इस मिज़ाज को वो सियासतदां बनकर भी तब्दील कर पाने में नाकाम रहे हैं । इस लिहाज़ से कहा जा सकता है कि कैलाश सारंग अपने अंदर मौजूद ज़ज़्बा ए हमदर्दी को बेदर्दी बनाने की कोशिशें करके भी बेबस , बेकार और बेदम ही रहे होंगे ।
मेरी मालूमात के मुताबिक कैलाश सारंग के पुरखे भी सूफियाना मिज़ाज के थे । यू.पी. के जिला बाराबंकी में मझगवां शरीफ नाम के मुक़ाम पर विश्व के महान सूफी हज़रत ख़्वाजा मुईनउद्दीन हसन गरीब नवाज़ चिश्ती अजमेनी साहेब रहे ....... के सूफियाना सिलसिला - ए चिश्त अहल - ए - बहिश्त से तअल्लुक रखने वाले मशहूर सूफी हज़रत मखदूम मोहम्मद खामिस अब्दुला रूमी चिश्ती सारंग साहब रहे .... की दरगाह शरीफ़ है और वहां के लोग उन बुजुर्ग को हजरत सारंग बाबा के नाम से पुकारते हैं । हज़रत सारंग बाबा साहब से गहरी निसबत और अक़ीदत होने की वजह से कैलाश सारंग के पूर्वज कायस्थ होने के बावजूद श्रीवास्तव , सक्सेना , सिन्हा , खरे या अपने गौत्र का “ सरनेम ” अपने नाम के साथ जोड़ने के बजाए सारंग लिखना ज्यादा पसंद करते थे , तब से लेकर पीढ़ी - दर - पीढ़ी इनके खानदान में सभी लोग अपने पीर - ओ मुनशिद की निस्बत से ही अपनी पहचान यानी सारंग के रूप में पहचाने जाने पर गर्व करते हैं । अब इनके खानदान की आने वाली नस्लों में अपने नाम के साथ सारंग को जोड़कर रखा जाएगा या बदल दिया जाएगा , यह तो हम नहीं कह सकते , लेकिन कैलाश सारंग और उनके बेटे तो आज भी इस देश में इसी सारंग नाम से जाने पहचाने जाते हैं ।
कैलाश सारंग की जिन्दगी पर निगाह डालने पर ऐसा महसूस होता है कि ज़िंदगी के मैदानी सफर में उनके हमअसर साथियों और दीगर लोगों से उनकी रफ्तार काफी तेज़ है , क्योंकि यह भी एक सच्चाई है कि जिन्दगी का मैदान दरअसल एक दौड़ का मैदान है , जिसमें हर शख्स दौड़ रहा है या दौड़ने पर तुला हुआ है । सभी दौड़ने की कोशिशों में मसरूफ है , मज़ेदार बात यह है कि इस मैदान में वह लोग भी दौड़ रहे हैं , जो इस मैदान में दौड़ने के तौर तरीके और नियम - कायदों की भी पूरी तरह वाकिफ नहीं है । यानी कि दोड़ने के आदाब भी नहीं जानते हैं , इसीलिए वो लोग अक्सर पिछड़ जाते हैं और बाउसूल जिन्दगी की दौड़ में कैलाश सारंग जैसे लोग अब भी सबसे आगे दौड़ते नज़र आते हैं और जीवन की दौड़ का नज़ाना देखने वालों की अकल शायद इसीलिए दंग रह जाती है । कैलाश सारंग के तर्ज़ अमल को देखकर यह बखूबी साबित किया जा सकता कि वो एक होशमंद , वासलाहियत और बाहौसला इंसान है , जो इस बेहयायी - बेगैरती के दौर में भी कामयाब जिन्दगी जीने का सलीक़ा और शउर रखते हैं यानी के बासलीका और बाशऊर इंसान हैं। कैलाश सारंग की जिन्दगी के साथ पहलू और सभी गौशों पर पैनी निगाह रखने वाला उनका कोई करीबी दोस्त या हमनवा भी उनके बारे में तफसील से बताने के बजाए शायर - ए वतन हज़रत शहीद आसिफ़ शाहमीरी साहब के अलफाज़ में बस यही कहेगा कि :
कौन जाने कितने उसके रूप हैं और कितने उसके रंग
अरे भैया गिनते - गिनते शायद ज़िन्दगी पड़ जायगी तंग
चाहे कैसा भी हो वो आदमी जो रहे उन जैसों के संग
तो उससे भी इक दिन छूट ही जायेंगे सारे बुरे बदरंग
सौ करोड़ दिल हैं यहां चार सौ करोड़ हैं अंग
फिर भी मेरे भारत में सिर्फ एकअदद सारंग
कब तक उस जैसीं शबनम करेगी मसाईल के अंगारों से जंग
आखिर कब होगी सुहानी सुबह और कब देश में होगा खुश रंग
बाखुदा मत करो मेरी तुलना उन जैसे लोगों के संग
बाहर जिनका कुछ और हो भीतर का कुछ और रंग
कहीं सियासी जंग है और कहीं मज़ाहिब की जंग
सबका अपना - अपना रंग है और अलग - अलग ढंग
देखकर कुछ तो हैं हैरत में और कुछ हो गए है दंग
मक्कारों की भीड़ से अब भी अलग बड़ा है सारंग
उस दिन बदलेगी फिज़ा , बदलेगा बेइमानी का मौसम
जिस दिन बुलबुल लड़ते - लड़ते बाज़ों से जीतेगी जंग
अलग - अलग नौ रंग जब मिलते हैं , तो बनता है नवरंग
मगर सारंग को जब भी देखो तो वो लगता है अपना सा रंग
रंग - ए - तस्व्वुफ के मतवालों पर नहीं चढ़ता किसी का रंग
वो तो रंगे हैं अपने मुरशिद के रंग में जिसमें है नई उमंग
शेर - ओ - सुख्न में यह कैसा बेमेल दौन है आया है
न तरव्वयुल है इसमें , न मज़ा , नहीं कोई आहंग
सूफी होता है साफ सुथरा और इबादत का पाबंद
चाहे जिस नज़र से देखो सूफी में दिखते हैं सब रंग
गंदगी कीचड़ में मत फेंक तू मूरख कोई रेजा - ए - संग
दामन हो जाएगा तेरा मैला और छींटे आयेंगें तेरे ही अंग
जिन्दगी में अगर रंग हैं फीके तो भी हो सकता है तेज़ रंग
मगर शर्त यह है प्यारे , तू जारी रख अपनी वामक़सद जंग
चाहे दुनियां कुछ भी कर ले मगर हारेगा वो यकीनन जंग
ज़ालिम का होगा सर नीचा , मज़लूमों की आहें जब लाऐंगी रंग ,
फिरंगियों के तौर तरीके , फिरंगियों जैसे उनके ढंग
भारत के अमीरों को देखकर भैया हम तो रह गए दंग
उसका जीना बेकार है , जिस दिल में नहीं कोई उमंग
ये जीना भी कोई जीना है , जिसमें न हो बुराई से जंग
मुरशिदों से सीख ले तू जीवन के रंग - ढंग ,
मेरी बात मान ले मतकर सच्चों से कोई जंग ,
पंडित बन गये हैं कबाड़ी , सैय्यद कर रहे रंग ,
फिर भी जात - पात की जारी है अभी तक जंग ,
मशक करने से आ ही जायेगा तुझे शेर - ओ - सुखन का ढंग ,
सब्र कर प्यारे तेरी शायरी में भी होगा गालिब जैसा आहंग
दर - ब - दर कब तक फिरेगा कर ले समझौता उनके संग
दुनियों के मीज़ान में भले ही जिनका नहीं कोई पासंग
सतरंगी दुनियों में हैं भैया , तरह - तरह के कई रंग
किसी को सफेद पसंद , तो किसी को भाए काला रंग
जनरंग है जनता की पसंद मगर हाकिम का अलग रंग
सब रंगों में एक सा दिखे हां वो ही तो है अपना सारंग
समझ में आ गया उसके जिन्दगी का फलसफा
जिसने बारिशों में भी बखूबी उड़ा ली है पतंग
चलो आसिफ़ चलकर हम लोगों को यह समझाऐं
चढ़ा दो अपने यारों पर तुम अपने ही जैसा रंग
कैलाश सारंग हरफनमौला हैं , मैं तो बस इतना जानता हूं बाकी वो क्या - क्या हैं ? यह तो रब ही जानें । कुल मिलाकर यह कहने में मुझे कोई हिचक हीं है कि वो एक बासलाहियत बैलोस इंसान हैं और बेगर्ज अवामी खिदमतगार हैं :
बहुत मुश्किल है यह काम नहीं आसान , गर है इंसान
दुनियों में खुद भला होना और लोगों का भला करना ।
( -लेखक ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी , नई दिल्ली के चैयरमेन हैं )
Leave A Comments